अमित शर्मा

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रविवार, 31 जनवरी 2016

"अघटित घटन, सुघट बिघटन, ऐसी बिरुदावली नहिं आन की।"

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विनय पत्रिका में तुलसी बाबा हनुमानजी के लिए कहते हैं  "अघटित-घटन, सुघट-बिघटन, ऐसी बिरूदावलि नहिं आनकी" जो न घटने वाली घटना क...
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