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भारत भारती वैभवं
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रसाई
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मंगलवार, 30 नवंबर 2010
जर्रे जर्रे में तू ही, दिखे ना कोई अलहदा ------- अमित शर्मा
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रसाई माँगता हूँ नज़रों की तुझसे खुदा जर्रे जर्रे में तू ही, दिखे ना कोई अलहदा नाद-ऐ-अनलहक की गूंज में सरसार रहूँ एक तू ही एक ह...
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