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भारत भारती वैभवं
कहानी नहीं हकीकत
समाज - सरोकार
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प्रतुल वशिष्ठ
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सोमवार, 7 फ़रवरी 2011
"मन आज मुझे ना जाने क्या-क्या कहता. नंगों को ही नंगा करने को कहता" --- प्रतुल वशिष्ठ
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शांत चित्त कवि-ह्रदय प्रतुल जी वसंत पर्व पर एक नवीन ही आराधना कर रहे है. एक नवीन सरस्वती-आराधना गीत में उन्होंने अपने भाव प्रज्वलित किये है,...
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