शनिवार, 20 मार्च 2010

बच्चो की तरह से

बच्चे किसे अच्छे नहीं लगते ,उनका बोलना ,खेलना ,लड़ना क्या बताये बस देखते ही रहो ,लड़ाई से याद आया हम दोनों भाई भी बचपन में खेल ही खेल में गुत्थम गुत्था होजाया करते थे . अब भाई साहब लड़ाई तो पहले किसी ने भी शुरू करी हो पर जब पिटने का नंबर आता तो जोर से आवाज लगाते, मम्म्मीईईईईईईई भाई मार रहा है .
यह जमाल साहब भी ऐसे ही कुछ कर रहें है -मतलब यह की जमाल साहब को खुद ही गालियाँ सुनना पसंद है, चला चला के इस तरह की पोस्ट लिख रहें है. जमाल साहब को गालियाँ सिर्फ इस तरह की पोस्ट पे ही ज्यादा मिली है (यह बात अलग है की जमाल साहब ने इस तरह की पोस्ट ही ज्यादा लिखी है ). जमाल साहब ने कुछ अच्छा लिखने का दावा किया कुछ प्रश्न पूछे ,किसीने जवाब दिया तो आपने पलटकर बताया क्या की हां भाई यह बात सही है - यह बात गलत है , बस आपको तो गालियाँ ही दिखाई दी , (पता नहीं क्यों सिर्फ गलियां ही दिखाई दी वैसे सावन के अंधे को भी हरा ही हरा सूझता है ),
जमाल साहब अपनी असली मंशा क्यों नहीं बता पा रहे हो अभी तक ,जरा खुल के कहो यार.और यह गालियाँ भी क्या पता आप ही तो नहीं मार रहे है कुछ भी भरोसा नहीं होता अब तो आप के ऊपर ,

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